इस खल’नायिका को दिल दे बैठे गब्बर सिंह अमजद खान, आखिरी वक्त तक साथ निभाया

हिंदी सिनेमा के दिग्गज और मशहूर अभिनेता अमजद खान ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में दी थीं। उनका जन्म 12 नवंबर 1940 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई मुंबई से की ही थी। अमजद खान आरडी नेशनल कॉलेज में पढ़ते थे। कॉलेज में उन्होंने जर्लनल सेक्रेटरी का चुनाव भी जीता था। कॉलेज के समय से ही अमजद खान थिएटर से जुड़े हुए थे। जिसके चलते उनका शुरू से ही अभिनय की ओर रूझान रहा था।

अमजद खान भी बॉलीवुड के उन कलाकारों में से एक थे जिन्होंने बाल कलाकार के तौर पर फिल्मों में काम किया था। इसके बाद उन्होंने अब दिल्ली दूर नहीं, माया और हिंदुस्तान की कसम जैसी फिल्मों में काम किया था। अमजद खान को हिंदी सिनेमा में असली पहचान बॉलीवुड की सदाबहार फिल्म शोले से मिली थी। यह फिल्म साल 1975 में आई थी। इस फिल्म में अमजद खान ने गब्बर सिंह का किरदार निभाया था जो आज तक काफी मशहूर है।

फिल्म शोले के बाद अमजद खान ने कभी मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने चरस, परवरिश, अपना खून, मुकद्दर का सिकंदर, मिस्टर नटवरलाल, सुहाग, कुर्बानी, लव स्टोरी, याराना, उत्सव, मां कसम और सौतेला भाई सहित कई फिल्मों में काम किया था। अमजद खान ने 200 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम किया था। इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी की एक फिल्म ‘द परफेक्ट मर्डर’ में भी काम किया था।

फिल्मों के अलावा अमजद खान अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी काफी चर्चा में रहे थे। यह बात अमजद खान के बहुत कम फैंस को पता है कि वह बॉलीवुड की उस कल्पना अय्यर को प्यार करते थे, जिन्होंने तमाम फिल्मों में बेबस-बेगुनाह नायिकाओं पर बेपनाह जुल्म ढाए। भारी डील-डौल वाले गोरे-चिट्टे अमजद और दुबली-पतली इकहरे बदन की सांवली कल्पना अय्यर में देखने-सुनने में खासा अंतर था, लेकिन दोनों में एक गुण समान था। दरअसल, दोनों रुपहले पर्दे पर भोले-भाले निर्दोष पात्रों पर बड़े जुल्म ढाते थे। जिस तरह अमजद या तो खलनायक के रोल में फिल्मों में आए या फिर कैरेक्टर रोल में, उसी तरह कल्पना भी कभी हीरोइन तो नहीं बनीं, लेकिन खलनायिका का रोल उन्होंने भी खूब किया। फिल्मों में डांस नंबर भी किए। कुल मिलाकर कल्पना ने भी ढेर सारी फिल्में कीं।

अमजद और कल्पना की पहली मुलाकात एक स्टूडियो में हुई थी, जहां दोनों अलग-अलग फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। फिर यह परिचय प्यार में बदला। कल्पना जानती थीं कि अमजद शादीशुदा हैं। उनकी पत्नी हैं और उनके तीन बच्चे भी हैं। यदि कल्पना अमजद की बीवी बनने के लिए जिद करतीं, तो यह शादी हो भी जाती। लेकिन, दोनों ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया, क्योंकि अगर दोनों शादी करते तो अमजद के भरे-पूरे परिवार में तूफान आ जाता। जब तक अमजद खान जीवित रहे, वह कल्पना के दोस्त और गाइड बने रहे। कहते हैं कि अमजद चाय के बेहद शौकीन थे। दिन भर में पच्चीस-तीस कप, वह भी चीनी के साथ। कल्पना ने उनकी इस आदत पर कंट्रोल करने की कोशिश की, लेकिन जब भी वह कहतीं, अमजद हंसी में बात उड़ा देते।

जब अमजद का इंतकाल हुआ, तो कल्पना उनके घर गई। कल्पना के कई शुभचिंतकों ने उनसे वहां न जाने की सलाह भी दी कि पता नहीं अमजद के परिवार वालों का क्या रवैया हो? कहीं वह उन्हें भीतर आने ही न दें, लेकिन कल्पना ने यह सलाह नहीं मानी। कल्पना जानती थीं कि वह अमजद की ब्याहता नहीं हैं, लेकिन वह वहां शोक मनाने गईं। अपने उस दोस्त को आखिरी सलाम करने गईं, जिसके साथ उनका बेनाम रिश्ता था।

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