बंदर ले भागा बिनौली थाने के इंस्पेक्टर का मोबाइल और लखनऊ से DGP की घनघनाई घंटी, जानें- पूरा मामला

अच्छे-अच्छे कुख्या’त बद’माशों के छक्के छुड़ा देने वाली पुलिस को एक बंदर ने पूरे गांव में अपने पीछे दौड़ाने पर मजबूर कर दिया. दरअसल बागपत में एक बंदर थाने के इंस्पेक्टर का मोबाइल उठाकर ले गया. गांव में उछल-कूद करता हुआ बंदर आगे-आगे चल रहा था और पीछे-पीछे बिनौली थाना की पुलिस दौड़ रही थी.

पुलिस ने सहायता के लिए आवाज लगाई तो गांव के लोग भी पुलिस के साथ हो गए. उसके बाद पुलिस को अपने मोबाइल मि,शन में सफलता हाथ लगी तो पुलिस की जान में जान आई. इस पूरे मामले का पता लखनऊ में डीजीपी कार्यालय को लगा तो वहां से भी पूरे मामले की जानकारी ली गई.

बिनौली थाने में बंदरों का आतं’क है. कभी पहरा दे रहे सिपाही को परेशान करते हैं तो कभी फरियादी को. कई बार बंदर थाने के आफिस में घुसकर अभिलेख तक उठाकर ले जाते हैं. इस बार एक शरारती बंदर थाने में इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार त्यागी के आवास में उस समय दबे पैर घुस गया जब वह नाश्ता करने में व्यस्त थे.

इस दौरान उनका मोबाइल बेड पर रखा था. बंदर ने अचानक उनका मोबाइल उठा लिया और आवास से निकलकर पेड़ पर चढ़ गया. यह देख इंस्पेक्टर बंदर के पीछे दौड़े, लेकिन मोबाइल नहीं छुड़ा पाए, जिसके बाद इंस्पेक्टर ने दूसरे पुलिस कर्मियों की मदद मांगी.

पुलिसकर्मियों ने बंदर को पकड़ना चाहा, लेकिन वह थाने से बाहर निकल गया और एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले, दूसरे मोहल्ले से तीसरे मोहल्ले में पेड़ और मकानों की छतों पर इधर-उधर दौड़ता रहा और मोबाइल को हाथ में ही रखा. इस दौरान कई बार मोबाइल की घंटी भी घनघनाई.

परेशान पुलिस ने बंदर से मोबाइल को छुड़ाने के लिए गांव के लोगों की मदद मांगी, जिसके बाद गांव के लोग भी पुलिस के साथ हो गए. लगभग एक घंटे बाद पुलिस ने लोगों की मदद लेकर बंदर से मोबाइल छुड़ा लिया. इसी मोबाइल में थाने का सीयूजी नंबर भी था.

पुलिस से जुड़े लोग बताते हैं कि इंस्पेक्टर का मोबाइल ले जाने की बाद मीडिया और सोशल मीडिया पर आने लगी तो इसकी जानकारी लखनऊ में डीजीपी को हो गई. लखनऊ से डीजीपी ने बागपत के पुलिस अधिकारियों के पास फोन कर पूरे मामले की जानकारी ली. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बंदर मोबाइल ले गया था जो बाद में मिल गया है.

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