मदरसे से पढ़कर निकाला UPSC एग्जाम, कायम की मिसाल

मदरसे से पास होने वाले बच्चों को आमतौर पर सामान्य स्कूल-कॉलेज से पढ़े बच्चों से प्रतियोगिता के मामले मे अक्सर कम ही आंका जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि माना जाता है कि मदरसे में इस्लामिक शिक्षा पर ज्यादा जोर रहता है।

UPSC, IIT या नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी करिकुलम से वे पीछे रह जाते हैं, हालांकि हाल ही के कई वर्षो में आए यूपीएससी और नीट के रिजल्ट में मदरसे से पढ़े हुए बहुत सारे स्टूडेंट्स ने जगह बनाई है, जो इनके जैसे बाकी स्टूडेंट्स के लिए उम्मीद की किरण जैसा है।

बिहार के गया के रहने वाले शाहिद रजा खान के मां-बाप ने गरीबी के चलते उन्हें प्राइवेट स्कूल से निकलवाकर मदरसे में दाखिल कर दिया था, हालांकि UPSC के रिजल्ट में उन्होंने 751वीं रैंक लाकर दिखा दिया कि मदरसे से पढ़े बच्चे भी बहुत कुछ कर सकते हैं।

दिल्ली के JNU से इन दिनों पीएचडी कर रहे शाहिद ने बताया, ‘मेरे भाई डेंटिस्ट हैं। मैं जब 17 साल का था तो उन्होंने मुझे सिविल सर्विस में जाने के लिए प्रेरित किया। मैं उस वक्त सामान्य ज्ञान की एक किताब लेकर उसे पढ़ा करता था, तब मेरे साथी पूछते भी थे कि मैं सिलेबस से इतर कोई चीज पढ़ रहा हूं।

हाल के दिनों में यूपी समेत कई राज्यों में मदरसों ने अपनी शिक्षा पद्धति में काफी बदलाव किया है, इनके अलावा कई NGO सामने आए हैं, जो मुस्लिम स्टूडेंट्स को पढ़ाकर भविष्य के डॉक्टर, इंजिनियर, IAS तैयार कर रहे हैं।

शाहिद ने भी दिल्ली के जकात फाउंडेशन ऑफ इंडिया से पढ़ाई की थी, जकात फाउंडेशन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे मुस्लिम बच्चों को मुफ्त और सब्सिडाइज्ड ट्यूशन देता है। इस साल सिविल सर्विस में पास होने वाले 27 में से 18 बच्चे यहीं से हैं।

‘मदरसे से पढ़े स्टूडेंट्स की योग्यता में कोई कमी नहीं’
जकात फाउंडेशन के फाउंडर सैयद जफर महमूद कहते हैं कि वह हर साल 65 बच्चों का ऐडमिशन सिविल सर्विस की कोचिंग के लिए लेते हैं। इनमें से 5-6 स्टूडेंट्स मदरसे से पढ़े हुए होते हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे उनकी योग्यता और क्षमता में कोई फर्क नहीं दिखता है।

हमारे संस्था में ऐडमिशन एक एग्जाम के जरिए होता है, तो जाहिर सी बात है कि इनका स्तर भी सामान्य छात्रों जैसा ही है।’ महमूद ने सच्चर कमिटी की रिपोर्ट पर बतौर एक ऑफिसर काम किया था। जो मुस्लिमों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को हाइलाइट करती है। कमिटी की रिपोर्ट आने के बाद महमूद ने फाउंडेशन खोलने का मन बनाया।

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