मुस्लिम बेटी नाजिया बनने जा रही गांव की पहली डॉक्टर, पिता टेंपो चलाते हैं, मां करती है मजदूरी!

किसी ने क्या खूब कहा है कि सपने देखो तो उन्हें पूरा करने में जी जान लगा दो। अगर आपकी मेहनत सच्ची होगी तो आप एकदिन जरूर सफल होंगे। राजस्थान के झालावड़ की रहने वाली नाजिया की कहानी भी आपको एक नई सीख देगी। नाजिया उनमें से एक है जो लाख मुसीबतों के बाद भी अपने हौसलों को टूटने न दे। नाजिया पर ये पंक्ति बिल्कुल फिट बैठती है। ”राहों में मुसीबत आई पर हार न मानी….राहों में मुसीबत आई पर हार न मानी, मंजिल पर पहुंचकर लिखूंगी सफलता की नई कहानी। ”

नाजिया का बचपन गरीबी में बीता है। पिता इसामुद्दीन टेम्पो चालक हैं। मां आमिना भी मजदूरी करती हैं। माता-पिता मिलकर मुश्किल से घर की जरूरतें पूरी कर पाते हैं। ले देकर घर का गुजारा होता है। पूरे परिवार के साथ नाजिया ने गरीबी को बेहद करीब से देखा है।

परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के साथ कभी समझौता नहीं किया। कभी भी पैसों की कमी से बेटी की पढ़ाई रुकने नहीं दी। उसकी जिंदगी से ज्यादा ख्वाहिश नहीं है, वो बस एक डॉक्टर बनकर परिवार को आर्थिक संकट से मुक्ति दिलाना चाहती है।

नाजिया पढ़ाई में बेहद होशियार स्टूडेंट में आती हैं। परिवार में कुछ सदस्यों ने बेटी की पढ़ाई को लेकर काफी सवाल किए। लेकिन माता-पिता के सपोर्ट से बेटी को प्रोत्साहन मिला। उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था। नाजिया हाईस्कूल और बारहवी में 90 से अधिक प्रतिशत के साथ पास हुई। इन्हें राज्य सरकार की तरफ से स्कॉलरशिप भी मिली। इस स्कॉलरशिप की मदद से उसने नीट की तैयारी की। वह डॉक्टर बनना चाहती थी जिसके लिए खूब मेहनत की। पहली बार में उसे सफलता नहीं मिली, लेकिन उसने मेहनत करना जारी रखा। 2021 में 668वीं रैंस हासिल कर अब वह गांव की पहली डॉक्टर बनने वाली हैं। नाजिया अपने गांव की पहली बेटी है जो डॉक्टर बनकर अपना और परिवार का नाम रौशन करेगी।

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