बिजनेस मे इतने कामयाब रतन टाटा क्यों हुए प्यार मे फेल, और शादी क्यों नही किया, हुआ बड़ा खुलासा

एयर इंडिया (Air India) की बोली टाटा सन्स (Tata Sons) ने जीत ली. कंपनी ने इस सरकारी एयरलाइंस के लिए सबसे अधिक 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई. इसी के साथ एयर इंडिया करीब 68 साल बाद फिर से टाटा समूह के पास लौट आई है. रतन टाटा अपने सरल स्वभाव और व्यक्तित्व को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. यहां तक फैन्स ने उन्हें भारतरत्न देने की मांग तक उठाई है. आपको बताते हैं कि कैसा रहा रतन टाटा का बचपन, किस तरह शादी के तक नहीं पहुंची प्रेम कहानी।

एयर इंडिया (Air India) की बोली टाटा सन्स (Tata Sons) ने जीत ली. कंपनी ने इस सरकारी एयरलाइंस के लिए सबसे अधिक 18,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई. इसी के साथ एयर इंडिया करीब 68 साल बाद फिर से टाटा समूह के पास लौट आई है. इस मौके पर समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा (Ratan Tata) ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए ट्वीट करते हुए कहा ‘वेलकम बैक होम’! इसी के साथ उन्होंने एयर इंडिया की 1932 में शुरुआत करने वाले विजनरी बिजनेसमैन जे.आर.डी. टाटा का एअर इंडिया के साथ एक फोटो और मेसेज भी शेयर किया है. रतन टाटा अपने सरल स्वभाव और व्यक्तित्व को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. यहां तक फैन्स ने उन्हें भारतरत्न देने की मांग तक उठाई है. आपको बताते हैं कि कैसा रहा रतन टाटा का बचपन, किस तरह शादी तक नहीं पहुंची प्रेम कहानी।

लॉस एंजिल्स में हुआ था प्यार  टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने कई बार अपनी निजी जिंदगी और प्रेम कहानी को लेकर बात की है. टाटा संस के 82 वर्षीय एमेरिटस चेयरमैन रतन टाटा को दो साल तक एक कंपनी में काम करने के दौरान लॉस एंजिल्स में प्यार हो गया था, लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध के कारण तनाव ने उन्हें शादी करने से रोक दिया. उनका बचपन काफी खुशहाल था, लेकिन माता-पिता के तलाक की वजह से उन्हें और उनके भाई को थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना भी करना पड़ा।

इसलिए झेलनी पड़ी कठिनाई  उन्होंने अपने बचपन के बारे में भी बताया कि कैसे चीजें उनके लिए हमेशा आसान नहीं थीं. उन्होंने बताया कि “मेरा बचपन खुशहाल था, लेकिन जैसे-जैसे मेरा भाई और मैं बड़े होते गए, हमें अपने माता-पिता के तलाक के कारण रैगिंग और व्यक्तिगत परेशानी का सामना करना पड़ा, जो उन दिनों में उतना आम नहीं था जितना आज है.” रतन टाटा ने बताया कि उनके पिता नवल और मां सोनी टाटा का तलाक उस वक्‍त हो गया था जब वे महज 10 साल के थे।

दादी ने बहुत कुछ सिखाया  उन्होंने बताया कि  “जब मेरी मां ने दोबारा शादी की, उसके तुरंत बाद, स्कूल के लड़के हमारे बारे में हर तरह की बातें कहने लगे, लेकिन हमारी दादी ने हमें हर कीमत पर गरिमा बनाए रखना सिखाया.” उन्‍होंने कहा कि “मुझे आज भी याद है कि किस तरह द्वितीय विश्‍व युद्ध के बाद वह मुझे और मेरे भाई को गर्मियों की छुट्टियों के लिए लंदन लेकर चली गईं थीं. वास्‍तव में वहीं उन्‍होंने हमारे अंदर मूल्‍य डाले. वह हमें बताती थीं कि “ऐसा मत कहो” या “इस बारे में शांत रहो” और इस तरह हमारे दिमाग में ये बात डाल दी गई कि प्रतिष्‍ठा सबसे ऊपर है.”

पिता से विचारों का था मतभेद उन्‍होंने अपने और पिता के विचारों में मतभेद के बारे में बात करते हुए कहा कि “मैं वॉयलन सीखना चाहता था और मेरे पिता पियानो सीखने के लिए कहते थे. मैं पढ़ाई के लिए अमेरिका के कॉलेज में जाना चाहता था, जबकि पिता चाहते थे कि मैं लंदन जाऊं. मैं आर्किटेक्‍ट बनना चाहता था और वो कहते थे इंजीनियर बनो.”  हालांकि बाद में रतन टाटा पढ़ने के लिए अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी गए और इसका पूरा श्रेय उनकी दादी को जाता है. आर्किटेक्‍ट से ग्रेजुएशन करने पर उनके पिता नाराज हो गए. फिर रतन टाटा लॉस एंजेलिस में नौकरी करने लगे जहां उन्‍होंने दो सालों तक काम किया।

पढ़ाई के दौरान हुआ प्यार  उन दिनों के बारे में उन्होंने बताया कि  “वह काफी अच्‍छा समय था, मौसम बहुत खूबसूरत था, मेरे पास अपनी गाड़ी थी और मुझे अपनी नौकरी से प्‍यार था.” लॉस एंजेलिस में रतन टाटा को प्‍यार हुआ और वो उस लड़की से शादी करने ही वाले थे. हालांकि, उन्‍होंने वापस भारत जाने का फैसला किया क्‍योंकि उनकी दादी की तबीयत ठीक नहीं थी. रतन टाटा को ये लगा था कि जिस महिला को वो प्‍यार करते हैं वह भी उनके साथ भारत चली जाएगी. रतन टाटा के मुताबिक, “1962 की भारत-चीन लड़ाई के चलते उनके माता-पिता उस लड़की के भारत आने के पक्ष में नहीं थे और इस तरह उनका रिश्‍ता टूट गया.”

Leave a Reply

Your email address will not be published.