पिता बेचते हैं चाय समोसा और दूध, बेटियों ने बोर्ड परीक्षा में किया टॉप, गरीबी नहीं बनी पढ़ाई में बाधा

हमारे देश में आज भी बेटियों को लेकर अलग नजरिया है। देश के कई हिस्से ऐसे हैं जहां बेटी को उसके घरवाले जल्दी से उसकी शादी करने के लिए परेशान हो जाते हैं। लेकिन अब लोगों की मानसिकता में काफी परिवर्तन हो रहा है। अब अधिकतर लोग लड़कियों को बो’ झ समझने की बजाए उन्हें अब बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको झारखंड की रहने वाली दो बेटियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने हालातों से लड़कर अपनी तरक्की का रास्ता तैयार किया है।

हाल ही में झारखंड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने जारी किया है परिणाम:मई जून के महीने में देश के सभी शिक्षण संस्थान और शिक्षा बोर्ड अपने परिणाम जारी करते हैं। पिछले दिनों झारखंड बोर्ड ने भी 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम जारी किया। जिसमें कुछ छात्रों ने अच्छे अंक लाकर घर और समाज का नाम रौशन किया है। इसी लिस्ट में झारखंड के चक्रधरपुर जिले के कारमेल स्कूल में पढ़ने वाली तानिया शाह और निशु कुमारी का नाम भी शामिल हो गया है, जिन्होंने 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 500 में से 490 अंक हासिल करके पूरे प्रदेश टॉप किया है। दोनों एक ही स्कूल कारमेल स्कूल में पढ़ती हैं। 10वीं में 490 मार्क्स लाकर स्टेट टॉपर बनी हैं।

पिता बेचते हैं चाय समोसा और दूध लेकिन बेटियों की पढ़ाई रुकने नहीं दी:दोनों बेटियों के परीक्षा परिणाम आए तो माता पिता की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। तानिया के पिता सतीश शाह पास में ही एक चौराहे पर चाय समोसे बेचते हैं और मां घरों में काम करती हैं, जबकि निशू के पिता दिनेश कुमार यादव एक छोटे से डेयरी फार्म चलाते हैं और खुद घर घर जाकर दूध बेचते हैं। घर में गरीबी भले ही परेशान करती रही, लेकिन दोनों पिता ने अपनी बेटियों की पढ़ाई पर इसका ज़रा सा भी प्रभाव नहीं पड़ने दिया। तानिया ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता और अध्यापकों को दिया है। उसका कहना है कि 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई वह साइंस स्ट्रीम से करना चाहती है।

निशु ने बताया कि पहले से ही प्लान बनाकर पढ़ रही थी कि एग्जाम में अपना बेस्ट देना है। टॉपर बनूंगी यह तो कभी नहीं सोचा था। निशु को मैट्रिक में 500 में से 490 नंबर मिला है। हिंदी में 98, अंग्रेजी में 97, गणित में 100, विज्ञान में 100, सामाजिक विज्ञान में 95, आईटीएस में 84 मार्क्स आए हैं। दोनों बेटियों के पिता कहते हैं कि उनकी गरीबी में बेटियां ही दूर करेंगी। उन्हें कभी बेटे की कमी नहीं खली। उनका कहना है कि बेटियां घर के कामों में भी सहायता करती हैं और अपनी पढ़ाई भी। इनकी सफलता आने वाली हाईस्कूल और इंटर की लड़कीयों के लिए बड़ी मिसाल है।

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