डॉ सैयद जहांगीर वो प्रोफेसर जो गरीब बच्चों को दे रहे है मुफ्त शिक्षा, खाना और घर, पढ़ें पूरी स्टोरी

देश में साक्षरता दर बढ़ाने की तमाम कोशिश सरकार रही हैं लेकिन कुछ प्राइवेट संस्थाओं ने शिक्षा को सिर्फ एक व्यवसाय तक सीमित कर दिया हैं। चाहे प्राइमरी एजुकेशन की बात हो या फिर सिविल सर्विसेज की हर जगह शिक्षा की गुणवत्ता पै,सों पर निर्भर करती हैं। ऐसे में किसी आर्थिक रूप से कमजोर बच्चा जो की निचले तबके से आता हो वो अच्छी शिक्षा से वंचित रह जाता हैं। ऐसे में कई लोग ऐसे भी हैं जो इन आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए उनकी अच्छी शिक्षा दीक्षा के लिए प्रयासरत भी हैं। उनमें से ही एक हैं प्रो डॉ सैयद जहाँगीर।

प्रो डॉ सैयद जहाँगीर इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज विश्विद्यालय में अरब स्टडीज के हेड ऑफ डिपार्टमेंट भी हैं। डॉ सैयद उन सब बच्चों की हर सम्भव मदत करते हैं जो आर्थिक रूप से दक्ष नही हैं या जिन्हें आप हालातों का मारा कहते हैं और वो पढ़ने की चाह रखते हैं। डर सैयद ऐसे बच्चों को न सिर्फ अच्छी शिक्षा प्रदान करवाते हैं बल्कि उनके रहने का सारे इंतज़ाम के साथ भोजन आदि की भी व्यवस्था करते हैं। प्रोफेसर साहब उन गरीब बच्चों को इंग्लिश,लैंग्वेज,सामाजिक और राजनीतिक विज्ञान वगैरा पढ़ाते हैं।

डॉ जहाँगीर कहते हैं कि ‘बेहतरीन शिक्षा के लिए महान विद्यालयों की बजाय सर्वश्रेष्ठ शिक्षक की आवश्यकता हैं। मेरा मानना हैं कि कमजोर वर्ग के बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन की जरूरत ज्यादा होती हैं। अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करे तो उन्हें अच्छे स्कूल की बजाय अच्छे शिक्षक मुहैया कराना चाहिए। प्रोफेसर साहब ने एक सरकारी इस्लामिक विश्विद्यालय शुरू किया हैं जहां बच्चे,अंग्रेज़ी,संस्कृत,अरबी,उर्दू, फ़ारसी जैसे कई भाषायें सिख सकते हैं,उन्हें यहाँ आधुनिक शैली में पढ़ाया जाता हैं। मैं अपने विश्विद्यालय के कामो से निवित्त होकर शाम को अपना सारा वक़्त इन बच्चों को पढ़ाने में लगाता हूँ। साथ ही साथ उन्हें मुफ्त शिक्षा के साथ रहने के लिए छत भी देता हूँ। उनके यहाँ से पढ़े कई स्कालर्स बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में लैंग्वेज ट्रांसलेटर हैं।

यहाँ पढ़ने वाले छात्रों का अनुभव: उस विश्विद्यालय में पढ़ने वाले बिहार के एक छात्र सादिक ने बताया कि यहाँ हमारे लिए सारी व्यवस्थाएं हैं। हम सब यह यहाँ पढ़ कर बहुत खुश हैं। यही से पढ़कर शिक्षक बने एक विद्यार्थी अब्दुल अलीम कहते हैं कि 8 साल पहले मैंने यहाँ पढ़ाई की थी अब विज्ञान शिक्षक के रूप में मैं यहाँ तैनात हूँ आज शिक्षा की लागत इतनी अधिक हैं कि कई युवा उच्च शिक्षा तक नही ग्रहण कर पाते हैं। इसलिए यहाँ की शिक्षा में लोगों को गुणवत्ता दी जाती हैं।

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