12वीं में फेल हुए तो टीचर बोले- तुम ज़ीरो हो ज़ीरो, लेकिन कड़ी मेहनत कर IAS अफसर बने सैय्यद रियाज

स्कूल में कई बार टीचर्स की डांट बच्चों के अत्मविश्वास को झकझोर कर रख देती है. ऐसे में कुछ बच्चे तो मानसिक तनाव के शि,कार हो जाते हैं। इतना ही नहीं ऐसे बच्चे पढ़ाई से भी मन चुराने लग जाते हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जिनके लिए टीचर्स या पेरेंट्स की डांट सफलता की घुट्टी की तरह काम करती है. सफलता की ऐसी ही दास्तां है महाराष्ट्र के सैयद रियाज अहमद की।

रियाज़ जब 12वीं में फेल हुए तो उनके टीचर ने पिता के सामने कह दिया कि आपका बेटा ‘बिल्कुल ज़ीरो है ज़ीरो’ अगर ये ही हाल रहा तो लाईफ में कुछ नहीं कर पाएगा’। लेकिन यहां रियाज़ पिता ने बेटे का मनोबल नहीं टूटने दिया। उन्होंने रियाज़ के टीचर को यकीन दिलाया कि उनका बेटा जीवन में बहुत बड़ा काम करेगा। कुछ सालों बाद जब रियाज़ ने IAS की परीक्षा पास कर ली और अखबारों की सुर्खियों में छा गए तो हर किसी ने कहा कि बेटे ने पिता की कही बात का मान रख लिया।

सैयद रियाज अहमद ने यूपीएसएसी यानी संघ लोक सेवा आयोग 2018 परीक्षा में 261वीं रैंक हासिल की है। लगातार असफलताओं का सामना कर रहे सैयद रियाज ने एक समय में हिम्मत खो दी थी। लेकिन फिर भी सपने को पूरा करने की ललक ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्होंने आईएएस बनने की तैयारी शुरू कर दी। इसके लिए उन्होंने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि अपनी रणनीति से तैयारी भी की। आइए जानते हैं- उनकी कहानी जो सभी को प्रेरित करने वाली है।

रियाज अहमद ने एक इंटरव्यू में बताया कि “मेरे घर में मेरे माता-पिता ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। जबकि मेरे पिता तीसरी कक्षा में हैं, उनकी मां ने सातवीं तक पढ़ाई की है। उनका कहना है कि मैं 12वीं में एक विषय में फेल हो गया था। तब मुझे बहुत बुरा लगा, तैयारी करके फिर से एक औसत अंक लाया। लेकिन इसके बाद उन्होंने काम करना नहीं छोड़ा और हमेशा क्लास में टॉप किया।

मूल रूप से नागपुर के रहने वाले रियाज कॉलेज में छात्र राजनीति में आए थे। उनका कहना है कि 2013 में वे छात्र नेता थे, छात्र राजनीति में शामिल होने के लिए परिवार का कोई सहयोग नहीं मिला। फिर मैंने सोचा कि मैं शिक्षा के क्षेत्र में इस नेतृत्व को कैसे बदल सकता हूं। तब मेरे दिमाग में नौकरशाह यानी bureaucrat बनने का विचार आया।”

साल 2013 में सैयद रियाज ने पूना जाकर तैयारी शुरू की थी। उनका कहना है कि मुझे न तो कुछ पता था, न ही टेस्ट सीरीज के बारे में पता था और न ही तैयारी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी थी। फिर वर्ष 2014 में पहली उपस्थिति दर्ज की और प्रीलिम्स में फेल हो गया। फिर सोचा कि कुछ नहीं है और 2015 में मैंने जामिया की आईएएस अकादमी में दाखिला लिया। फिर 2015 में प्रीलिम्स दिया। उस साल की परीक्षा में 93 सवाल पूछे गए थे, नेगेटिव होने के कारण प्रीलिम्स में मार्क्स नहीं आए तो लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया। दोस्तों ने कहा कि तैयारी अच्छी नहीं है। तब मुझे समझ आया कि गलत रणनीति की वजह से ऐसा हुआ है।

रियाज़ की ‘123 रणनीति’: इसके बाद रियाज ने प्रीलिम्स की अपनी रणनीति बनाई और इसे ‘123 रणनीति’ का नाम दिया। उनका कहना है कि 1, जिन सवालों को लेकर मैं कॉन्फिडेंट हूं, उन्हें पहले करना था। फिर 2 में जिन प्रश्नों में मैं उलझन में हूं उन्हें उस वक्त छोड़ दिया और बाद में समय बचने उन प्रश्नों के सोच समझकर उत्तर दिया। फिर 3 जो बिल्कुल नहीं आए, उन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया। 1 करने के बाद वह 2 कैटेगरी पर हल करता था।

उनका कहना है कि 2016 में प्री-मेन ने इस स्ट्रैटेजी से क्वालिफाई किया, लेकिन इंटरव्यू में फेल हो गए। तीसरे अपीयरेंस में फेल होने के कारण मैं थोड़ा नर्वस था। इसके बाद घरवालों ने मॉरल सपोर्ट दिया। जब उनके पिता सेवानिवृत्त यानी रिटायर हो गए, तो रियाज को लगा कि अब उन्हें अपनी आर्थिक सहायता खुद ही ढूंढनी चाहिए। रियाज़ अपने पिता को परेशान नहीं करना चाहता था बल्कि खुद काम करना चाहते थे।

नौकरी की तलाश में बन गए RFO:रियाज का कहना है कि उसी साल उन्हें नौकरी की तलाश करने का विचार आया और उन्होंने राज्य सेवा की परीक्षा दी। इस परीक्षा को बहुत अच्छे नंबरों से पास किया और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) बने।

फिर दी आईएएस की परीक्षा और मा,र ली बाज़ी:5 अप्रैल 2019 को जब रिजल्ट आया तो वह 261वें स्थान पर था। रियाज कहते हैं कि उन्होनें अपने पिता को फोन किया. “पांच साल का पूरा सफर मेरी आंखों के सामने नाचने लगा। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि पापा जिस नतीजे का इंतजार कर रहे थे, वह आ गया है। मैंने अपने पिता से कहा कि आपका इंतजार खत्म हुआ, अब मैं सेलेक्ट गया हूं।”

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