सुशांत सिंह राजपूत की वो यादगार फिल्में, जो फिर से जिंदा कर देती हैं उनका एहसास

दो साल पहले महज 32 साल की उम्र में बेहद ही टैलेंटेंड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौ’त ने सभी को झंकझोर कर रख दिया था। चाहे कोई उनका फैंन रहा हो या न रहा हो, सभी को सुशांत का इस तरह चले जाना अखर गया था। मंगलवार को उन्हें गुजरे हुए दो साल हो चुके हैं। टीवी सीरियल पवित्र रिश्ता से अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत करने वाले सुशांत को उनके मानव के किरदार ने घर-घर में पहचान दिलाई थी। जिसके बाद वे कई फिल्मों में नजर आए और इनमें से कुछ फिल्में तो ऐसी है जिन्होंने सुशांत को एक अभिनेता के रूप में और निखारा और हमेशा के लिए अमर कर दिया। आज सुशांत की कुछ ऐसी ही फिल्मों की बात करेंगे।

काई पो चे:

पवित्र रिश्ता के बाद जब फिल्मों में एंट्री करने के बारी आई तो एक्टर ने फिल्म काई पो चे से अपना डेब्यू किया था। यह फिल्म साल 2013 में आई थी। जिसमें सुशांत के साथ राजकुमार राव और अमित साध भी मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की कहानी तीन नौजवान लड़कों के ईर्द- गिर्द घूमती है। जो पूरी जिंदादिली से अपने पैशन को फॉलो करते हैं, लेकिन एक हाद’सा होने के बाद इनकी जिंदगियां बदल जाती है।

एम एस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी:

एम एस धोनी सुशांत की यादगार फिल्मों में से है। जो कि भारतीय क्रिकेटर एम एस धोनी की बायोपिक है। यह 30 सितंबर 2016 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने सुशांत के करियर को नई ऊंचाइयां दी थी। कमाई के मामले में भी फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया था।

सोनचिड़िया:

सोनचिड़िया एक थ्रिलर फिल्म है। जो चंबल जिले के डकै’तों के जीवन पर आधारित है। इसमें सुशांत के साथ मनोज बाजपेयी, रणवीर शौरी और भूमि पेडनेकर जैसे मंझे हुए कलाकारों की टुकड़ी है। फिल्म को क्रिटिक्स से तो तारीफ मिली थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर पाने में असफल रही थी।

छिछोरे:

साल 2019 में आई छिछोरे सुशांत की बेहद ही खास फिल्म है, क्योकि ये उनके डे’थ के कुछ महीनों पहले ही रिलीज हुई थी। छिछोरे ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता था।

केदारनाथ:

केदारनाथ के साथ अभिनेत्री सारा अली खान ने सुशांत के ऑपोजिट डेब्यू किया था। जो कि 7 दिसंबर 2018 को रिलीज हुई थी। फिल्म का कहानी 2013 में आई उत्तराखंड की बा’ढ़ पर आधारित थी। केदारनाथ में सुशांत एक मुस्मिल पिठ्ठू के किरदार में नजर आए थे। जो दर्शनार्थियों को केदारनाथ मंदिर तक ले जाते थे।

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