‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ पर घुटना टिकाती टीम इंडिया क्या शमी को गद्दार कहे जाने पर भी स्टैंड लेगी

संडे था, तो अमूमन सबकी छुट्टी ही थी. जिनकी नहीं थी, वो भी दफ्तरों और दुकानों में स्टार स्पोर्ट्स या हॉटस्टार लगा कर बैठे थे. अब वर्ल्ड कप में इंडिया पाकिस्तान का मैच हो, तो कोई मिस थोड़ी करेगा! मैच में क्या होगा, ये थोड़ी किसी को पता था. टीम इंडिया अभी बाउंड्री लाइन चूमकर मैदान में उतरी नहीं थी.

कि खिलाड़ियों ने अपने घुटने टेक दिए. नहीं नहीं. आप गलत समझ रहे हैं. हारे तो खैर हम विधिवत, लेकिन अभी हम उसकी बात नहीं कर रहे हैं. दरअसल टीम इंडिया के खिलाड़ियों ने घुटने के बल बैठकर एक संदेश देने की कोशिश की.

#BlackLivesMatters. अमेरिका समेत दुनिया के कुछ देशों में नस्लभेद अब भी एक समस्या है. काले-गोरों में फर्क किया जाता है. पिछले साल जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या वाली तस्वीर कोई कैसे भूल सकता है! टीम इंडिया ने नस्लभेद के खिलाफ एक अच्छा जेस्चर देने की कोशिश कीकरना भी चाहिए.

लेकिन इस तस्वीर के साथ कुछ सवाल औंधे मुंह आ गिरे.  कहीं भी हो रहे किसी भी भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाना जरूरी है. वो स्कूल में होने वाली मॉर्निंग असेंबली में एक ‘आज का सुविचार’ था ना, कि ‘दूसरों की गलतियां बताने से पहले अपने अंदर झांकना चाहिए’.

जब टीम इंडिया के खिलाड़ी नस्लभेद के खिलाफ संदेश देने की कोशिश कर रहे थे, तब क्या देश में सभी तरह के भेदभाव खत्म हो चुके थे. जाहिर सी बात है, नहीं. आज भी धर्म के आधार पर, जाति के आधार पर देश में होने वाली वीभत्स घटनाओं की गिनती खत्म नहीं होती.

और ना ही खत्म होती है इन घटनाओं के बचाव में उतरने वाले सोशल मीडिया के जाहिलों की ज़हरीली जमात. जाति के आधार पर कुछ लोगों को शादी में घोड़ी नहीं चढ़ने दिया जाता, साथ बैठने नहीं दिया जाता.

मंदिर परिसर के पास मैदान में क्रिकेट खेल रहे एक अल्पसंख्यक लड़के को खेलने नहीं दिया जाता है. और आए दिन कुछ लोग जो पाकिस्तान जाने की सलाह देते हैं. उनका क्या! क्या कभी टीम इंडिया ने देश में हो रही इन घटनाओं के लिए सांकेतिक प्रदर्शन दर्ज करवाया? जवाब है नहीं.

याददाश्त पर ज़्यादा ज़ोर डालने की जरूरत भी नहीं है. कल मैच था, टीम इंडिया हार गई. सामान्य तौर पर नहीं, बुरी तरह हारी. 10 विकेट से हारी. बोलिंग हो या बैटिंग, पाकिस्तान की टीम हर एस्पेक्ट से भारत पर हावी रही.

खैर, ये तो खेल है, हार जीत लगी ही रहती है. ये वाला ब्रह्मवाक्य भी आपने ट्विटर पर पढ़ ही लिया होगा. लेकिन जो टीम इंडिया कल हारी, उसमें 11 खिलाड़ी खेल रहे थे. अब इसमें कोई नई बात तो है नहीं.

क्रिकेट की एक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं, तो 11 ही खेलेंगे. लेकिन सोशल मीडिया पर दिन भर नफरती ज़हर की उल्टी करने वालों को ये सिंपल सी बात समझ नहीं आती.

इधर टीम इंडिया मैच हारी. उधर व्यावसायिक और दिमागी तौर पर खाली लोगों ने सोशल मीडिया पर एक खिलाड़ी को टार्गेट करना शुरू कर दिया. वो खिलाड़ी कौन! सही पहचाना! मोहम्मद शमी. शमी ने कल इंस्टाग्राम पर एक फोटो डाली थी.

पाकिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया के हारते ही कुछ लोगों ने अपनी पूरी भड़ास शमी के कॉमेंट बॉक्स में निकाल दी. गद्दार, देशद्रोही, पाकिस्तान से पैसे लेने वाला वगैरह-वगैरह. शमी को क्या नहीं कहा गया. इतना तो ‘चक दे इंडिया’ के स्क्रिप्ट राइटर भी कोच कबीर खान के लिए नहीं सोच पाए थे.

पाकिस्तान के खिलाफ खेलने वाली टीम में शमी ही एक मात्र मुस्लिम थे. और यही वजह रही कि लोगों ने मानसिक दिवालियापन का पूरा नमूना पेश कर दिया. मानो पूरा मैच अकेले शमी ही खेल रहे थे.

क्या बुमराह की गेंदबाजी ने पाकिस्तान का धागा खोल दिया था? क्या भुवनेश्वर की स्विंग से पाकिस्तान पस्त हो गया था? क्या जडेजा ने मुस्कुराते हुए अपनी फिरकी से बाबर आज़म को नचा दिया था? नहीं ना. कोई ऐसा गेंदबाज था, जिसको बाबर और रिज़वान ने तबीयत से धोया ना हो?

अच्छा गेंदबाजी छोड़िए, बल्लेबाजों ने क्या किया. कोहली और ऋषभ पंत के अलावा किसी के बल्ले पर ढंग से गेंद नहीं आ रही थी. और कोहली की कप्तानी पर आप क्या कहेंगे! कुछ कहने को है क्या. लेकिन नहीं मैच का मुजरिम कौन, मोहम्मद शमी. क्योंकि वो एक धर्म विशेष से आते हैं.

खैर इन मेंटली मालनरिश्ड लोगों को छोड़िए, मैच के पहले #BlackLifeMatters के लिए अपने घुटनों पर बैठे टीम इंडिया के खिलाड़ियों में से किसी एक ने भी क्या शमी के लिए स्टैंड लिया! ये खबर लिखे जाने तक तो नहीं.

कुछेक पूर्व खिलाड़ी, हर्षा भोगले जैसे कमेंटेटर्स  और टीम से बाहर बैठे चहल जैसे खिलाड़ी तो बोले हैं, लेकिन कोर टीम की चुप्पी भयानक है.

तो क्यों ना टीम इंडिया के खिलाड़ियों से सवाल ना पूछे जाएं? BCCI और टीम मैनेजमेंट पर क्यों ना सवाल उठाए जाएं? नस्लभेद का विरोध पूरे दमखम से करना चाहिए. इसकी जितनी भर्त्सना की जाए उतनी कम है.

हर जगह विरोध किया जाना चाहिए. लेकिन कम से कम टीम इंडिया के खिलाड़ी अपने साथी पर हो रहे नफरती अटैक पर तो बोल ही सकते हैं. कप्तान कोहली और दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड कम से कम अपने खिलाड़ी के लिए स्टैंड तो ले ही सकते हैं. और जब तक ये नहीं होता, #BlackLivesMatters जैसे मुद्दों पर घुटने टिकाना बेहद हास्यास्पद लगता रहेगा.

 

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