थर्रा देनेवाली वो 11 भारतीय फ़िल्में, जो मज़हबी दं’गों पर आधारित थीं

तुम्हारी आख़िरी बात जिसमें तुमने बस इतना कहा था प्रेम मनुष्य को जीवन भर मा’रता है और फिर अंत में अमर कर देता है.l मुझे दुःख बस इस बात का हैकि मैं जानता हूँ अमरता मनुष्य के हिस्से आने वाली सबसे बड़ी त्रा’सदी है.

अनुराग अनन्त के इतर क्या हम सब भी जानते हैं कि अमरता सबसे बड़ी त्रा’सदी है. और इसकी उपज प्रेम है. इसलिए न हम प्रेम करते हैं. न ही किसी को अमर होने देते हैं. मृ’त्यु जीवन का शाश्वत सत्य है. मानव इससे भलीभांति परिचित है. इसलिए धार्मिक उन्माद फैलाया जाता है. धर्म के नाम पर नरसं’हार होते हैं.

भीड़ का चेहरा नहीं होता लेकिन, धर्म होता है. भारत के परिपेक्ष्य में वो धर्म हैं हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई आपस में सब भाई-भाई. क्या हम भाई-भाई हैं! आप इस पर मनन करिए. तब तक हम किसी और बात पर चिंतन करते हैं.

कश्मीरी पंडितों की त्रा’सदी पर बनी फ़िल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ आजकल चर्चा में है. इस फ़िल्म से पहले भी कई ऐसी फिल्में बनीं, जो भारत में घटी कुछ बड़ी मानवीय त्रास’दियों पर बेस्ड थीं. दं’गों पर बेस्ड थीं. जिनके पीछे धार्मिक उन्माद रा:क्षस की तरह मुंह बाए खड़ा है. आज हम ऐसी ही कुछ फ़िल्मों की बात करेंगे.

हमारी लिस्ट में पहली फ़िल्म है डायरेक्टर गोविंद निहलानी की ‘तमस’. यह फ़िल्म भीष्म साहनी के उपन्यास तमस पर बेस्ड है. फिल्म बंटवारे की मार झेले प्रवासी सिख और हिंदू परिवारों की दुर्द’शा का खाका खींचती है. पहले इसे दूरदर्शन पर मिनी सीरीज़ की तरह रिलीज़ किया गया. बाद में 5 घण्टे की फ़ीचर फ़िल्म के तौर पर. तीन नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली इस फ़िल्म में ओम पुरी और सुरेखा सीकरी जैसे कलाकारों ने काम किया है.

नेक्स्ट फ़िल्म है खुशवंत सिंह के उपन्यास पर आधारित फ़िल्म ‘ट्रेन टू पकिस्तान’.  यह भारत-पाक बंटवारे के दौर की कहानी कहती है.  जब पाकिस्तान से सिख ला’शों से भरी ट्रेन मनो माजरा आती है. तो ऐसी ही एक ट्रेन पाकिस्तान भेजने की कवायद शुरू होती है. इसे डायरेक्ट किया है पामेला रुक्स ने. फ़िल्म में निर्मल पाण्डेय और ब्योमकेश बख्शी वाले रजीत कपूर ने अहम किरदार निभाये हैं.

एक और उपन्यास आधारित फ़िल्म पिंजर. जिसमें मनोज बाजपेयी और उर्मिला मातोंडकर लीड रोल में थे. 2003 में बनी यह फ़िल्म पार्टीशन के समय महिलाओं के साथ हुई ज़्यादती को पेश करती है. इसे डायरेक्ट किया है हाल ही में पद्मश्री पाने वाले डायरेक्टर चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने.

अगली फिल्म है डायरेक्टर गोविंद निहलानी की देव. इसमें अमिताभ बच्चन, ओम पुरी, अमरीश पुरी और करीना कपूर लीड रोल्स में थे. 2004 में आयी यह फ़िल्म 2002 के गुजरात दं’गों पर आधारित है. इसके लिए गोविंद निहलानी को डायरेक्शन का और करीना कपूर को एक्टिंग का फिल्मफेयर भी मिला.

‘चांद बुझ गया’. एक ड्रामा-थ्रिलर फ़िल्म. जिसे डायरेक्ट किया शारिक मिन्हाज ने. फैसल खान और शमा सिकंदर ने इसमें लीड रोल किये. मूवी 2002 दं’गों के बैकड्रॉप पर आधारित है. पहले CBFC ने इसकी रिलीज़ पर रोक लगा दी थी. फिर बॉम्बे हाइकोर्ट के दख़ल के बाद इसे रिलीज़ किया गया.

‘परज़ानिया’. 2002 गुजरात दं’गों पर बेस्ड इस फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह और सारिका ने मुख्य किरदार निभाए. मूवी एक 10 वर्षीय पारसी लड़के की सच्ची कहानी से इंस्पायर्ड है. जो गुजरात दं’गों के दौरान 28 फरवरी 2002 को गुलबर्ग सोसाइटी नर’सं’हार में लापता हो गया था.

‘फिराक़’. नंदिता दास की डायरेक्टोरियल डेब्यू फ़िल्म. 2002 गुजरात दं’गे के एक महीने बाद सेट है. दं’गे से प्रभावित लोगों का जीवन अचानक कैसे बदल गया? दं’गों ने किस तरह से मानव जीवन को प्रभावित किया. फ़िल्म इस सच्चाई की पड़ताल करती है. इसमें परेश रावल, नसीरुद्दीन शाह और नवाज़ुद्दीन ने अहम रोल किये हैं.

सुशांत सिंह राजपूत की डेब्यू फ़िल्म काय पो छे. जो चेतन भगत के उपन्यास थ्री मिस्टेक्स ऑफ माय लाइफ पर बेस्ड है. मूवी में 2002 गुजरात दं’गों के कुछ भ’यानक पहलू दिखाए गये हैं. इसे डायरेक्ट किया है ‘रॉक ऑन’ के डारेक्टर अभिषेक कपूर ने.

नेक्स्ट फ़िल्म है दिलजीत दोसांझ और किरण खेर स्टारर पंजाबी फिल्म ‘पंजाब 1984’. 2014 में रिलीज़ हुई यह पीरियड ड्रामा 1984-1985 के समय पर केंद्रित है. फ़िल्म एक ऐसी घटना के बारे में बताने की कोशिश करती है, जो उन लोगों के जीवन में घटी, जो इंदिरा गांधी की ह’त्या का हिस्सा थे ही नहीं. इस फिल्म का बैकग्राउंड उस लापता लड़के की कहानी है, जिसे पु’लिस ने उठा लिया था.

हमारी लिस्ट में अगली फ़िल्म है ’31 अक्टूबर’. 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की ह’त्या होती है. ह’त्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दं’गे भड़क:ते हैं या भड़’काये जाते हैं. इन्हीं दं’गों वाली रात में लाखों लोगों की तरह अपनी जान बचाते वीर दास और सोहा अली खान. जिनकी 10 महीने की एक बच्ची भी है. इसे मराठी फ़िल्म डायरेक्टर शिवाजी लोटन पाटील ने डायरेक्ट किया है.

2020 में आयी विधु विनोद चोपड़ा की फ़िल्म शिकारा, एक यंग कपल की कहानी है. जो साम्प्रदायिक तनाव के चलते हज़ारों कश्मीरी पंडितों की तरह कश्मीर छोड़ने को मजबूर हैं. आदिल खान और सादिया खातीब ने फ़िल्म में लीड रोल किये हैं.

यह थीं 11 ऐसी फ़िल्में, जो भारत में समय-समय पर धार्मिक उन्माद के चलते हुई त्रासदियों की दास्तान और प्रभाव को उजागर करती हैं. और हमें इंट्रोस्पेक्शन करने का मौक़ा देती हैं.

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